ये कविता हमारे भारतीय समाज की महिलाओं की जरुरत है ये कविता हमारे भारतीय समाज की महिलाओं की जरुरत है
फरवरी में ही इश्क़ हो जाए जरूरी है क्या फरवरी में ही इश्क़ हो जाए जरूरी है क्या
तुम कभी इंतज़ार ना करो जरूरी तो नहीं कि तुम भी मुझसे प्यार करो। तुम कभी इंतज़ार ना करो जरूरी तो नहीं कि तुम भी मुझसे प्यार करो।
मेरा सुत भी हो मुझसा ही यह मेरा इच्छित वर है। मेरा सुत भी हो मुझसा ही यह मेरा इच्छित वर है।
लक्ष्य पाना है कर पूर्ण समर्पण है नितांत निस्वार्थ बालपन। लक्ष्य पाना है कर पूर्ण समर्पण है नितांत निस्वार्थ बालपन।
देश सेवा करते हुए बच्चों की समस्या सुलझाएगा। देश सेवा करते हुए बच्चों की समस्या सुलझाएगा।